रविवार, मार्च 22, 2020

कोरोना शब्दावली, corona glossary, covid19

कोरोना एक जुकाम का वायरस है - इसका जिक्र जीव विज्ञान की इंटरमीडिएट की किताबों में मिलता है |  परन्तु  कोविद19 यानि covid19  जिस वाइरस ने दुनियां में त्राहि-त्राहि मचा रखी है , उसकी  जाति  तो एक है लेकिन बनावट और संक्रमण का तरीका एकदम भिन्न। 

Translated  in English by Anupam Bisht

Corona is virus that results in flu disease in humans with typical of common flu- symptoms. Typically, the coronavirus is introduced to biology students of intermediate classes. This particular strain of virus (Corona virus disease 2019 , covid – 19) has brought about chaos all out the world.  It is believed to have originated (or mutated to human infection level) from a fish market in Wuhan, China.
The virus has different ways of transmission to patients. It is a new virus and hence there is no vaccine as yet (march 2020). Today over 3.5 lakh  (350000) people are infected by this, over 100000 are recovered. However, over 13000 have died, mostly elderly patients who suffer from some or the other age-related ailments.

 उससे सम्बंधित कुछ शब्दावली नीचे दी जा रही है :
Below are a few commonly used terminologies (glossary) with respect to Corona.

१. सामुदायिक  संक्रमण (community transmission): जब संक्रमण का स्तर  इतना पहुंच जाय कि  ये पता ना चल पाय कि इन  बीमार  व्यक्तियों  को संक्रमण कहाँ से आया |
[उदाहरणरार्थ , आज-कल के हिन्दुस्तान में  इस बीमारी से ग्रस्त  करीब-करीब 100 प्रतिशत  बीमारों के संक्रमण का मिलान किसी न किसी ऐसे व्यक्ति से किया जा पा रहा है -जो, हफ्ते -दो हफ्ते पहले  विदेशों से हिन्दुस्तान में दाखिल हुआ है|] इसका मतलब ये है कि  अभी (२२ मार्च  २०२०  तक ) भारत में सामुदायिक संक्रमण या तो नहीं हुआ है, या फिर हमारे पास इतने टेस्ट केंद्र नहीं हैं, जो ये बता पा रहें हैं| 

हालांकि जिस गति से संक्रमित व्यक्तियों की  संख्या में पिछले दो दिनों में  इजाफा हुआ है (१०० प्रति दिन) ,  रहा है कि हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की पता करने की गति कुछ  कम है  | देखते हैं - इस हफ्ते में - क्या होता है |


I. Community transmission: When the level of infection increases, where one cannot trace out the incoming link of the infection in the affected patients. For example,  presently most of the coronavirus affected patients in India have contracted the disease from meeting or in being close contact with people who have returned from foreign travel in the last 1- 2 weeks. This means that, in India till now there is either no ‘community transmission’ or we do not have the resources (i.e. testing centres /kits) to identify it. Looking at the rise in the number of affected individuals in the past days (100 per day)   it appears that the testing ability was a bit less. We have to wait and watch what happens this week !

 २. झुण्ड प्रतिरोधकता  [हर्ड इम्युनिटी (Herd immunity) ]:  


यदि किसी बीमारी से दो चार होने के बाद किसी समाज के व्यक्तियों में  उस बीमारी के  प्रभाव को रोकने के लिये शरीर में कुछ वस्तुओं का सृजन होता है। ऐसी वस्तुओं को प्रतिपिंड  (antibodies) कहते हैं।  प्रतिपिंड तभी पैदा होते हैं जब उस  बीमारी के वाइरस उस समाज के बड़े हिस्से में आ तो जाए परन्तु  उन्हें बीमार न कर  पाएं  | इस तरह से उस समाज के बचे हुए लोग भी बीमारी से बचे रह जाते हैं - इसे झुण्ड प्रतिरोधकता कहते हैं|  

II. Herd immunity: After a person is affected by a disease, the body of the affected person produces certain substances (proteins) which protect the individual if he/she comes contracts with the disease. These substances are called antibodies and help in providing immunity from that specific disease for which it was produced. In case a large part of the population develops this disease or, in the future they are given vaccines they will have antibodies. In this way they will no more contract the infection and hence protect the other individuals who haven’t got the disease yet.



३. सामाजिक दूरी एवं संगरोधन (social distancing and quarantine/ isolation)



 संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने के लिए अलगाव की स्थिति  को इन शब्दों से जाना जाता है|  संगरोधन या तो अस्पतालों में  किया जाता है या फिर  स्वत:-संगरोधन (self-quarantine) के लिए सुझाव दिया जाता है |  कुछ ऐसे लोग जिनको कोविद १९ से संक्रमित पाया जाता है किन्तु उनको कोई प्रभाव नहीं दीखता , उन्हें 14 दिनों के लिए प्रथक निगरानी   (quarantine) पर रखा जाता है ताकि यदि उन्हें इस दौरान कोई लक्षण दिखें तो सही इलाज दिया जा सके. 

इस समय इटली के बहुत सारे शहरों में लोगों को बिल्डिंगों में १४ दिनों के लिए  संगरोधित किया गया है , इसी तरह से आज बाहरवर्ष में सुबह ७ बजे से रात्रि ९ बजे तक "जनता कर्फ्यू " का आह्वान प्रधानमन्त्री जी   द्वारा किया गया था , जो की अक्षरतः सफल रहा | 

हाथ मिलाने के बजाय दूर से नमस्कार करना, इस हिसाब से - एक अच्छी आदतों  में है. शिक्षण संस्थानों में वीडियो व्याख्यानों द्वारा पढ़ाई तथा इसी तरह से इम्तहानों का लिया जाना इस समय की मांग है 


III. Social Distancing and quarantine/isolation
In order to stop the spread of the disease it is required to keep distance with other people and is known as social distancing. Quarantine can be done in hospitals or can be done by oneself (self-quarantine ). Presently, in many cities in Italy, many people have been quarantined in the buildings. Similarly, in India also on 22nd March 2019 a “Janata curfew” (people’s curfew”) was observed form 7am to 9pm which was suggested by the Prime minister, and was  quite successful.

To greet with a “Namaskar” from a distance instead of shaking hands has been considered as a good practice. Educational institutes are considering the need to deliver online video lectures as well as conducting similar online exams. 


४. वक्र समतलता (flattening the curve): 


पिछले एक महीने से भारत में इस बीमारी से संक्रमित लोगों की संख्या ३ से २०-४० तक रही|  जबकि पिछले दो दिनों में संख्या में प्रतिदिन ४०- से १०० तक का इजाफा हो गया|  इन दो संख्याओं को हम - दो तरह के वक्रों में  रख सकते है : पहले वाली समतल , जबकि दूसरी वाली खड़ी |  
 चूँकि  स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य गति से  आने वाली बीमारियों के लिये बनायी जाती हैं, अत: एकदम खड़ी  वक्र वाली बीमारियां स्वास्थ्य विभाग के लिए विकराल समस्या बन जाती है और स्थितियां महामारी (Pandemic) का रूप ले लेती हैं |  इसलिए वक्र समतलता बनाये रखने के लिए सरकारें "जनता कर्फ्यू "  या  लॉकडाउन  का सहारा लेती हैं.   हमारा कर्तव्य बन जाता है कि  ऐसे समय में  हम न सिर्फ सरकारों का पूरा सहयोग करें बल्कि घरों  से  से कम-से-कम निकलें .


IV. Flattening the curve: In the last month the population of corona patients in india has risen from 3 to 20-40. The number has increased from 40 to 200  in the last 2 days. The diseases can rise in two ways – (i).  very slowly (flat or almost no increase with time) , or (ii). drastically in a short period (exponentially).

As most of the people are generally healthy and the health care system of any country is designed  to tackle for the people who fall sick (generally slowly). When there is an exponential increase in the number of patients this leads to chaos in the society and hence causes a pandemic. Therefore, in order to keep the disease spreading gradually, the government has to takes steps such as ‘curfews’ or  ‘lockdown’ in the cities. This is in order to avoid the  curve to become steep. In such scenarios it is the responsibly of all individuals to cooperate and support the government while also avoiding to come out of houses. 

५. व्युत्पन्न प्रारुप वाले लोग   (Asymptomatic people): 
ये वो लोग होते हैं - जो बीमारी के संक्रमण  लिए हुए हैं किन्तु, उनके अपने प्रतिरोध  से उन्हें बीमारी नहीं हुई है, या फिर ठीक हो चुके हैं|   ये लोग भी बीमारी को फ़ैलाने का कार्य करते हैं |   चूंकि कोविद19 का वायरस  शरीर के अंदर १४ दिनों तक और स्टील या  प्लास्टिक की सतह पर ३ दिनों  तक  जिंदा रह जाता  है , इसका इलाज यही है कि ऐसे लोगों को १४ दिनों तक अलगाव की स्थिति  में  रखा जाय | 



V. Asymptomatic people: These are people who have contracted the disease, yet do not show symptoms or have recovered from the illness. They are still carriers of the infection. Since the covid – 19 virus can be inside the human body for 14 days while can remain in hard surfaces ( of plastic , metal ) for 3 days. Therefore, the ideal solution to prevent the spread of this disease is to quarantine people who have contracted or are probable to contract the disease. 


इस लेख को बनाने में अंग्रेजी के अखबार The HINDU (March 20, 2020) में  छपे एक लेख का उद्धृत करना उचित होगा : उस लेख के लेखक डॉ. सागर भट्टाड आदि हैं। 

आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए, और दूर-दूर रहने, अक्सर हाथ धोने की सलाह के साथ, 



प्रेम 


शुक्रवार, मार्च 06, 2020

होली है , कुमाऊं की होली, काली कुमाऊं, खड़ी होली, बैठी होली , Happy HOLI, Kumauni Holi, Kali Kumaun, Khadi holi

Baithaki holi: (collected on March 9, 2022)

होली है , कुमाऊं की होली, काली कुमाऊं, खड़ी होली, बैठी होली
Happy HOLI,  Kumauni Holi, Kali Kumaun, Khadi holi


 2 Other links on Kumauni Holi from this blog

1. Several holis

http://champawatsechennaitak.blogspot.com/2014/03/holi.html

2. Pd. Chhanu Lal Mishra:

शिव जी की होली-1: पंडित छन्नूलाल मिश्रा (link of 2009 from this blog)

http://champawatsechennaitak.blogspot.com/2009/05/blog-post.html

https://www.youtube.com/watch?v=RBievjUHLfE

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March 6, 2020
होली ( HOLI ):
था थइय्या थइय्या हो :

  • अरे कौन के हाथ रंगीलो ढप सोहै ,
     कौन के हाथ अबीर जोड़ी , था थइय्या थइय्या हो
    था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो

अरे राम के हाथ रंगीलो ढप सोहै ,
लछमन हाथ अबीर जोड़ी , था थइय्या थइय्या हो
था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो



  • अरे कौन के हाथ  कनक पिचकारी,
     कौन के हाथ अब्बीर जोड़ी , था थइय्या थइय्या हो 

था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो

अरे भरत के हाथ कनक पिचकारी,
शत्रुघन  हाथ अब्बीर जोड़ी ,था थइय्या थइय्या हो
था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो


  • अरे कौन राजा घर जनम लियो है?

कौन राजा घर ये जोड़ी,था थइय्या थइय्या हो
था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो

जनक राजा घर जनम लियो है
दशरथ के घर ये जोड़ी, था थइय्या थइय्या हो
था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो


  • अरे कौन समय सीता होरि  खेले 

कौन समय मैं ये जोड़ी, था थइय्या थइय्या हो
था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो

त्रेता में सीता होरि  खेले
द्वापर में है ये जोड़ी, था थइय्या थइय्या हो
था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो


  • अरे केसर घोल लियो बेलिया में 

  तिलक त राम लखन जोड़ी ,था थइय्या थइय्या हो
था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो


  • मात कौशल्या देत आशीषा, 

युग युग जीवै  ये जोड़ी , था थइय्या थइय्या हो
था थइय्या थइय्या होत बिंद्राबन में, था थइय्या थइय्या हो


थैय्या थैय्या होत बिंद्राबन में।


इसी तर्ज पर एक और होली,

"उठ भारत राम मिलन आये, उठ भारत हो. .......


{और बाकीं - राम और सीता की कहानी. }


शुभकामनाओं के साथ
प्रेम , मार्च ६ , २०२० 

मंगलवार, फ़रवरी 04, 2020

कोरोना वायरस

नए कोरोना वायरस का ख़ौफ़
(Novel corona virus, कोविद19 यानि covid19).

2019-nCoV यानि  कोविद19: २०१९ में पहली बार पाया गया वायरस जिसका नाम "कोविद19" है|  इस लेख को लिखने  तक दुनियां के करीब करीब सारे  महाद्वीपों में पहुंच गया है |  इसका श्रेय आप आज की तेज जीवन शैली जिसमें  हवाई यात्राओं की सुविधा का बहुत महत्व है, को दे सकते हैं | 

 Novel corona virus (covid19) is a new strain of coronavirus that has not been previously identified in humans. The new, or “novel” coronavirus, now called covid19, had not previously detected before the outbreak was reported in Wuhan, China in December 2019.

इस समय  (यानी ४ फरवरी २०२० के रात के ८ बजे ) चीन में करीब बीस हजार लोग इसकी चपेट में  आ चुके हैं. चीन ने ३ दिन में  एक १००० बैड वाला एक अस्पताल बना दिया है- जो चालू हो गया है |  केरल में  ३ लोगों की शिकायत आयी है | केरल ने इसे महामारी के रूप में  घोषित कर  दिया है | 
हिन्दुस्तान में करीब ८०००० लोगों को स्कैन किया गया है 

भारत के विदेश विभाग ने चीनी लोगों के सारे वीसा निरस्त कर दिए हैं|  उन और विदेशियों को भी भारत भ्रमण पर प्रतिबंध लगा दिया है- जो पिछले दो हफ़्तों में  चीन के दौरे पर थे. 

अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ संगठन के मुताबिक कोरोना वायरस के लक्षण  बुखार, खांसी, और सांस लेने में तकलीफ हैं | 
https://www.who.int/news-room/q-a-detail/q-a-coronaviruses
 ये भी बताया गया है कि अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना हैं | 

अगर आपको याद होगा तो कुछ १० साल पहले  स्वाइन फ्लू नामक बीमारी से हिदुस्तान में ऐसा ही कुछ हंगामा किया था |  पूना में  अपने बारे  में  पता करने के लिए इतनी लम्बी लाइनें लगी थी कि  लोगों का नंबर ही नहीं आया |  उस समय जाने माने डाक्टरों ने कुछ साधारण सी तकनीकैं बताई - जैसे 
रोज 
१. घर आते ही हाथों को साबुन से धोये. 
२.  गुनगुने नमक-पानी  से गराले करें.  
३. गुनगुने नमक-पानी  से नाक के अंदर थोड़ी सी सफाई जरूर करें. 
४. यदि जुकाम खांसी हो- तो ध्यान रखें ,  घर पर आराम करें.  खाना खाएं | 
५. जुकाम -खांसी वाले मनुस्य से दूरी बनाये|  

याद रखें - कि  वायरस वाली बीमारियां दवाओं से नहीं जाती ,  (जुकाम एक वायरस की बीमारी है) , इसके लिए ठीक ठाक  खाना  खाएं और घर पर आराम करें |  करीब -२ ३ से ४ दिन में  ठीक होना चाहिए. 
[मार्च २०२०:  ये पता चला है कि  कोविद १९ से ९-१०  दिन लग जाते हैं ठीक होने में ]

इसी तरह की देख रेख से इस बीमारी से भी निजात पायी जा सकती है. 

अच्छे स्वास्थ्य की शुभकामनाओं के साथ ,



प्रेम 
फरवरी ४, २०२० 

सरस्वती मया दृष्टा वीणापुस्तक धारिणी

सरस्वती मया दृष्टा वीणापुस्तक धारिणी |
हंसवाहन संयुक्ता विद्या दानं करोतु मे||

प्रथमम्भारती नाम द्वितीयञ्च सरस्वती। तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी।। पञ्चमन्तु जगन्माता षष्ठं वागीश्वरी तथा। सप्तमञ्चैव कौमारी चाष्टमं वरदायिनी।


रविवार, जनवरी 05, 2020

बुढ़ापा , old age

आज  (५ जनवरी २०२०) को इंडियन आइडल के प्रोग्राम ओल्ड-एज होम में  रह रहे बुजुर्गों के बारे में  था.
उसी मैं एक सड़क-छाप  टाइप का शेर था.  पेश है:  


"उम्र का बढ़ना दस्तूरे जहाँ है दोस्तों.
महसूस ना करो तो , बुढ़ापा कहाँ है दोस्तों"

"Friends: its obvious to age, but if you try to feel it otherwise, it can be ignored".


नए साल की शुभकामनाओं के साथ.

प्रेम

गुरुवार, सितंबर 26, 2019

तर्पण-श्राद्ध


ये श्लोक उस समझदारी को समर्पित है जो जिन्दा माता पिता को तो ठीक-ठाक (!) रखते ही हैं, लेकिन उनके महा प्रयाण के बाद तर्पण-हरपन श्राद्ध वगैरह पूरे मनोयोग से करते हैं.


"जीविते भोजनं नैव, मृते च भोजनं शतम् । जीवितैव हि तृप्तिश्चेत्, ब्रह्मानन्दफलं लभेत्|| "


जीवित परिवार के सदस्य को हो सकता है किसी कारणवश भोजन भी टाइम पर ना मिल पाया हो, लेकिन मृत्यु पश्चात तम्माम (सैकङों) भोज का आयोजन किया जाता है ;
जीवित मात -पिता , सास -ससुर की यदि सेवा ढंग से की जाय , तो मनुष्य (नर या नारी ) को अनेकों पुण्य प्राप्त होंगे. ||



प्रेम ट्विटर से , २५ सितम्बर २०१९

माता पिता श्राद्ध ,
Mother - father , Sharadh , tarpan

मंगलवार, सितंबर 24, 2019

मूर्ख तथा सज्जन


मूर्ख तथा सज्जन की परिभाषा :

"मूर्खस्य "पञ्च चिन्हानि" गर्वो, दुर्वचनं, तथा। क्रोधश्च, दृढवाद,श्चपरवाक्येष्वनादरः॥"

गर्व , दुर्वचन , क्रोध, दृढवाद , अनादर मूर्खों के पाँच लक्षण हैं - अभिमान, अपशब्द, क्रोध, हठ और दूसरों की बातों का अनादर ।

इन पाँच लक्षणों का त्याग करने से सज्जनता आती है.

-संस्कृत (sanskrit) , ट्विटर से :
प्रेम


 click this out at this blog
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शनिवार, जुलाई 06, 2019

यानाइ पक्का पुलाम पोला : If elephant enters the rice field-


भारत सरकार की  वित्त मंत्री  सुश्री  निर्मला सीतारमण  द्वारा ५ जुलाई २०१९ को बजट भाषण में एक तमिल कविता का उल्लेख किया गया:

काई नेल अरथु कावलम कोलिने 
अरविदाई वेन्थम नेरीयरिन्थु कोलिने 
परिवु थाबा एडुककुम पिनाम नच्चिन 
यानाइ पक्का पुलाम पोला 
थानुम उन्नान   उ लगामुम  केदूमे। 

(खेत से एक गठरी धान  लाने से हाथी के लिए  एक बार के लिए खाना हो सकता है . 
लेकिन कल्पना करो कि यदि हाथी ही खेत में  धान खाने चला जाये तो 
खेत का क्या हाल होगा ?)

Kaai nel aruththu kavalam koline
Arivudai venthan neriyarinthu koline
Parivu thaba edukkum pinam nachchin
Yaanai pukka pulam pola
Thaanum unnaan, ulagamum kedume

ये कविता मैडम ने नागरिकों से टैक्स भरने के लिए प्रेरित करने की लिए कही।   मतलब ये था कि  आप ईमानदारी से टैक्स भरें वरना कहीं सरकार आपसे भरवाने लगी तो काफी बर्बादी हो जाएगी.

[ये कविता तमिल संस्कृति में तिरुकुरल  (२००-३०० BC) से पुरानी मानी   हैं ]

प्रेम , ६ जुलाई २०१९ 

बुधवार, अप्रैल 17, 2019

जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ...

जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन  तैसी

जब भी लाइट जाये तो मुझे बड़ी शान्ति होती.  कि थोड़ा समय मिला इस जिल्ल्त भरी जिंदगी से,

आज के 'बनावटी प्रगत ' समाज में  भला लाइट न जाए,  या यों  कहें कि
-रास्ते  में  सरकारी गाडी ख़राब न हो, कहीं पर भी कोई रोक दे.
-ट्रैन करीब २ से १० घंटे देर से न चले [ addition: in July 2023, our train from Chennai to Thrisoor was late by 7 hours- however, SMS/ train position could be reasonably traced to start on time from home to station]
-ओला या उबर वक्त पर ना आएं
- या ऐसे ही ढेर सारे वो अनुभव जो मॉडर्न जीवन शैली के अभिन्न अंग हैं, और बिलकुल वैसे हे नहीं चलते- जैसे बताया  गया है-


लेकिन साहब - एक हम हैं - जो हमेशा इन्ही चीजों के लिए तैयार रहते हैं और बिलकुल भी ऐसा न लगेगा की ये ठीक नहीं. अब देखें:

एक कांफ्रेंस है-  इतने बड़े सभागार में  है कि आपको नाम सुनाकर क्या करेंगे.  बस ये समझ लीजिये कि  संसार में  ऐसे सभागार कुछ गिने -चुने होंगे.  कई मंजिला..  तम्माम इंतजाम.   जगह?  विलायत के पार्लियामेंट स्क्वायर के पास-  वेसमिन्स्टर स्टेशन के पास.

सुबह -देखा कि बिलकुल सड़कें पूरी ठसाठस -  लंदन के सभ्य लोग - या यहां आये हुए टूरिस्ट -  (जो कि ठीक -ठाक देशों से आये हैं) - ट्रैफिक सिग्नलों का पालन करते हुए सड़कें क्रॉस करते.    हमें कुछ २०० मीटर जाना था.  एक तो पुराने हिदुस्तानी -  "मैप रीडिंग"  में एकदम शून्य।   चर्चिल साहब का स्टैचू दिखने के बाद भी हम उल्टा गए-  कई चक्करों के बाद किसी तरह से ट्रैफिक से नेगोशिएट करते हुए अंततः  सभागार पहुंचे- समझ लीजिये कि हमें महाकुम्भ (अब १२ साल वाला ) नहा लिया.

हमें कुछ अच्छा नहीं लग रहा था कि  बड़ी गाड़ियां , रिक्शे जा रहे थे --रिकी-शा  एक जापानी शब्द है- इसका मतलब होता है-  रिकी (ताकत )  शा (वाहन) -  यानि  ताकत वाला वाहन -- जैसे डैन-श्या (बिजली वाला वाहन- इलेक्ट्रिक ट्रैन )  खैर। .

शाम होते न होते पूरा का पूरा पार्लियामैंट स्ट्रीट बंद - गाड़ियां बंद.  पता चला कि "क्लाइमेट सेविंग" के पक्ष में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं - और करीब दो तीन दिन तक चल सकते हैं.  हालांकि बिग बैन का रिपेयर कार्य चल रहा है  (इन्सिडेंटली - फ्रांस का नोस्टार्डम चर्च में  रेपेअर के दौरान आग लग गयी है ).  कई साड़ी मीटिंग्स हो रही थी सड़कों पर बैठे बैठे-  (कुछ याद आया?)
एक वक्ता  इस बात पर जोर दे रहे थे कि  'कुछ" लोग टैक्स नहीं दे रहे हैं!  ये सब हम आते-जाते वक्त देख लेते थे.

उधर कांफ्रेंस का अपना जलवा था.  लोग -कम्पनियां  बड़े जोर शोर से सीखने सीखने मैं लगे थे.




कांफ्रेंस के करीब ८-१० कमरों में से -एक में -थोड़ी देर के लिए -थोड़ा सी समस्या आ गयी.  आधे लेक्चर के दौरान प्रोजेक्टर का कनेक्शन नहीं आ पा  रहा था.. स्पीकर बिलकुल चुप.. टेक्निशियान लगे रहे लेकिन न.  मेरे समझ में  तो स्पीकर को कहना चाहिए  कि " ठीक है जब तक ये ठीक हो रहा है- में  आपको बताता हूँ कि इसमें क्या है- "  लेकिन   ऐसा नहीं हुआ -  सभागार का कनेक्शन ख़राब हो गया.






सो -इसीलिए इस पोस्ट का शीर्षक मैंने "जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन  तैसी ..."  रखा है.
सब चीजें वैसे ही हो गयी - जैसे हो सकती- चाहे वो लंदन का पार्लियामेंट स्क्वायर ही क्यों न हो.


प्रेम , अप्रेल १७, २०१९





शुक्रवार, मार्च 08, 2019

भविष्य की जानकारी (Knowing your future)

भविष्य की जानकारी (Knowing your future): Taylor's Series

पढ़ते-पढाते  एक ज्ञान प्राप्त हुआ है - सोचा साझा कर लिया जाय.
माना  f(t)  एक घटना है जो की वक्त के साथ बदलती है.  अब चूँकि यहाँ पढ़ने वाले बच्चे आएंगे - चलिए उनके छमाही अंकों से उनके सालाना अंकों का भविस्य जाना जाय. यहाँ पर f(0 ) को  बच्चे के छमाही के अंक मान लेते हैं.  यानी हमारा समय शुरू होता है अब (t=0).

परिवर्तन  की  दर (RATE OF CHANGE)
बदलाव, या परिवर्तन  की  दर (RATE OF CHANGE) को गणित  में  समय से भागा कर  दिखाया जाता है। 

df(t)/dt  यानि  f(t)  का डिफ़्रेंसिअल  को  f '(t) से दर्शाया  जाता है.

d2f(t)/dt2     यानि  f(t)  का फिर से  डिफ़्रेंसिअल  को  f "(t) से दर्शाया  जाता है.

"परिवर्तन में "  परिवर्तन  की  दर
अब हम मान के चलते हैं कि छात्र अपनी पढ़ाई में सुधार करता है.  सुधार की दर f '(0 ) है. इसी तरह से "सुधार में " सुधार की दर f "(0 ) है. 

तो हम आने वाले इम्तहान में  छात्र के अंकों का अनुमान निम्न सीरीज द्वारा लगा सकते हैं :

 f(t)=f (0 )+f '(0 ) t +0.5 f "(0 ) t +  इसी तरह से  आगे। ..

इसे टेलर  सीरीज  कहते हैं.
Taylor's theorem (without the remainder term) was devised by Taylor in 1712 and published in 1715, although Gregory had actually obtained this result nearly 40 years earlier. In fact, Gregory wrote to John Collins, secretary of the Royal Society, on February 15, 1671, to tell him of the result. The actual notes in which Gregory seems to have discovered the theorem exist on the back of a letter Gregory had received on 30 January, 1671, from an Edinburgh bookseller, which is preserved in the library of the University of St. Andrews (P. Clive, pers. comm., Sep. 8, 2005).

प्रेम , ८ मार्च २०१९

शनिवार, फ़रवरी 16, 2019

गुलों में रंग भरे............चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले


१. गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौबहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले क़फ़स उदास है यारों, सबा से कुछ तो कहो कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले चले भी आओ... जो हमपे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ हमारे अश्क तेरे आक़बत सँवार चले चले भी आओ... कभी तो सुबह तेरे कुंज-ए-लब्ज़ हो आग़ाज़ कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्क-ए-बार चले चले भी आओ... मक़ाम 'फैज़' कोई राह में जचा ही नहीं जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले चले भी आओ...

फ़ैज़  अहमद फ़ैज़  (Text Ref:   http://kavitakosh.org/kk/)

गायक:  मेहदी हसन    (रेशम के वाकिफ  मुलायम आवाज----परिवार १६ पुश्तों से  संगीत  साधना में   )
https://www.youtube.com/watch?v=aKwCwDPlOy8



२. रंजिश ही सही  (राग : यमन )
https://www.youtube.com/watch?v=dxv5U0F0nzw
रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ

पहले से मरासिम न सही, फिर भी कभी तो
रस्मों-रहे दुनिया ही निभाने के लिए आ

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ

इक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझको रुलाने के लिए आ

अब तक दिल-ए-ख़ुशफ़हम को तुझ से हैं उम्मीदें
ये आखिरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ..


(Ahmed Faraz)(Text ref:  http://kavitakosh.org/kk/)

Ranjish hi sahi dil hi dukhaane ke liye aa, (let it be anguish, come at least to hurt the heart)... Come to leave me gain...

३. एक और ग़ज़ल
https://www.youtube.com/watch?v=N-NkiHpE-wI

मंगलवार, जनवरी 15, 2019

छमा बड़न को चाहिये- Elders should learn to forgive..

The couplet of Rahim appears to make more sense now:


छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात 

कह रहीम हरि का घट्यो , जो भृगु मारी लात।

This is really interesting:

Elders must learn to forgive the nuisance created by youngsters (even at the work place).  The misbehavior of younger ones will be of similar value as a kick by an insect!

Other couplets of Rahim are given at this link



प्रेम , १५ जनवरी  २०१९.



बुधवार, जनवरी 02, 2019

नए साल की मुबारकबाद: एक पव्वा झिलमिल

नए साल की मुबारकबाद

व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी से एक वीडियो प्राप्त हुआ. जबसे उसे देखा है - इतना सजीव वर्णन मैंने किसी कविता में आज  तक नहीं सुना.  चाहे वह  "मुझे तोड़ लेना वनमाली! उस पथ पर देना तुम फेंक "  माखन लाल चतुर्वेदी की ये कविता ही क्यों  न हो.   आप भी  रसास्वादन करें. 

इस कविता या छंद के लेखक उच्चारक का नाम तो मुझे नहीं पता लेकिन गेहूं के पौधों की लम्बाई, धूप, और "गिंज" का उच्चारण ये इंगित करती है कि ये कवि  हमारे अल्मोड़ा जिले के होंगे.  यदि आप को इनका पता मिले (जैसे कि उस व्हॉटस्वैप मैसेज से आपको मिल सकता है- जो कि दिसंबर २०१८ के अंतिम सप्ताह में कुमाऊँ के कई जिलों में एक साथ प्रसारित हुआ यानि  'मैसेज वायरल हुआ "

"एक पव्वा झिलमिल  दो पव्वा टैट , तीन पव्वा ललबल  चार पव्वा फ्लैट |
पांच पव्वा गिंज आकाश, छै पव्वा एक सौ आठ - सात पव्वा घाट "

इस कविता की विधा भी एकदम अलग है- इसमें कवि  ने  "गागर में सागर भरने " वाला मुहावरा चरितार्थ किया है.

कविता के इस अंश को मैं उन कवि  से साभार लेते हुवे यहाँ जन साधारण के लिए टाइप कर रहा हूँ.  वीडियो मैसेज देना कवि  की निजता का हनन होगा.

यदि उसका अर्थ समझने में  मुश्किल हो तो- एक आध पेज लिखा जा सकता है- जब समय हो.

KEYWORDS : पिया शराब ,  नाली,  पाउच , कच्ची, अंग्रेजी, पव्वा , अध्धा,


प्रेम,  २ जनवरी २०१९. 

शनिवार, जुलाई 21, 2018

कलश Kalash

कलश


चम्पावत भ्रमण के दौरान एक सांसकृतिक  संस्था  के साथ रहने का मौका मिला। चम्पावत में  कुछ जानकार नागरिकों  (एवं आसपास के क्षेत्रों से नौकरी करने वाले साथियों ) ने एक संस्था की स्थापना की है. जिसका नाम है "कलश"  . कलश एक संगीत कला समिति है जिसके सदस्य वहां पर काम करने वाले , संगीत में रूचि रखने वाले संवेदनशील लोग हैं.  कलश कोई NGO  नहीं है।   इसका  उद्देश्य केवल संगीत एवं कला के क्षेत्र में कुमाऊँ  (अन्यथा सांस्कृतिक दरिद्रता के इस कठिन दौर में ) में इन कलाओं को जीवित रखना एवं जनसाधारण को प्रस्तुत  करने का है. सालभर करररीब १०-१२ बैठक अपने खर्चे पर आयोजित करते हैं.  उन्हीं मैं से एक की झलकियां हैं:

राखो मोरी लाज गरीब नवाज
https://www.youtube.com/watch?v=1SbBsL_hr5o

कलश के अन्य भजन 
https://www.youtube.com/channel/UCEtPYRuRheEpBZSBkzSUl-g

Duriing HOLI 2018 :
1. https://www.facebook.com/harish.pandey.3348390/videos/716527115401799/UzpfSTY4MTc4MDc1NzoxMDE1NjEyMzAwNzY0NTc1OA/

2. मुबारक मंजील फूलों भरी। . ऐसी होली जो खेंलें जनाबे अली.. 
 https://www.facebook.com/harish.pandey.3348390/videos/717924955262015/UzpfSTY4MTc4MDc1NzoxMDE1NjEyMjk4OTA1MDc1OA/

इसी बीच एक ट्रिप उन लोगों  के साथ पंचेश्वर   (-वो ही -जहाँ बाँध बनेगा) का   लगाया था।



शुभकामनाओं के साथ

प्रेम
जुलाई २१, २०१८

P.S. वा ह साहब क्या बात है. कलश- कुछ मुट्ठी भर  सांस्कृतिक रूप से सचेत नागरिकों का एक गुट है- जो संगीत मैं रूचि रखता है और संगीत को चम्पावत क्षेत्र मैं अपने बल बू ते पर बढ़ावा दे रहा है. उसके सदस्य अपने खर्चे पर संगीत का आयोजन करते हैं और आनद उठाते है।

शनिवार, जून 30, 2018

चम्पावती नदी

पता चला कि एक चम्पावती  (छोटी सी) नदी है जो आसाम में  बोंगाई गांव  में  ब्रह्मपुत्र नदी से मिलती है.

एक और नदी जो पूर्वी घाट से निकलती है. उसका नाम भी चम्पावती ही है।

https://en.wikipedia.org/wiki/Champavathi_River

शनिवार, जनवरी 27, 2018

Finger print verification: अंगूठे की कीमत

Finger print verification
अंगूठे  की कीमत
करीब एक साल पहले मैंने एक फ़ोन ख़रीदा. उसमें पासवर्ड की जगह एक ऊँगली के निशान  से चलने वाला बटन था. चेन्नई  में  रहते हुए जब भी मुझे फोन चलाना होता -मैं फट से फिंगर प्रिंट वेरिफिकेशन से फ़ोन चालू क र  लेता.

इत्तफाक से साल के अंत यानी दिसंबर २०१७  के दूसरे हफ्ते में हमें अपना मकान बदलना था. पिछले बीस सालों के दौरान इकठ्ठे सामान किसी तरह से इधर से उधर करने में  मेरी भी काफी मशक्क्त हुई।  मेरी क्या हुई मेरे हाथों की हुई. हालांकि मैने बिदेशी मजदूरों की तरह हाथ में दस्ताने भी पहने.  इसी दौरान जीजाजी की बरसी में चम्पावत जाना भी हुआ.  जहाँ का तापमान में धरती और शुक्र ग्रह का जैसा अंतर् था. शुक्र ग्रह का तापमान वगैरह यहाँ देखें (https://mars.nasa.gov/msl/mission/instruments/environsensors/rems/) ।  ये क्यूरोसिटी रोवर का कमाल है.

मैंने देखा -कि चम्पावत जाते जाते मेरे फ़ोन ने मेरे हाथों की उंगलिओं को पहचानने से इंकार कर दिया.  खैर फिलहाल नंबर वाले पासवर्ड को इस्तेमाल करता रहा. लेकिन इस बात से मेरा माथा ठनक गया.

बात सिर्फ इतनी थी कि या तो हाथों से काम  करने से या ठंड से फट जाने से मेरा मोबाइल फ़ोन -फिंगर प्रिंटस को पहचानने  में नाकामयाब रहा था.  आजकल इस तरह के फिंगर प्रिंट वेरिफिकेशन्स शोध संस्थानों या कंपनियों के बाहर लगे होते हैं ताकि आपके काम पर आने या जाने के समय की जांच हो सके. या कहें कि कौन आया -कौन गया ये पता रहे.  या ये कहिये कि अंदर जाने वाले ही जा पाएं, दूसरे नहीं.   ये फिंगर प्रिंट मशीनें या तो आधार संख्या पर चलती हैं या फिर आपके उँगलियों के   निशान एक बार  रिकॉर्ड कर लेती हैं.  इस तरह का वाकया  उन स्कूल के बच्चों के साथ - हो सकता है  जो  इम्तहान से  कुछ दिन पहले  (मेरी तरह से ) काम कर रहे  थे -और इस कारण से अपना  फिंगर प्रिंट वेरीफाई नहीं कर पाए .  मजदूरों के या कामगारों के साथ भी अक्सर  ये हो सकता है.   (इम्तहानों में तो ऐसे बच्चों की अलग से लिस्ट बन जाती है.).

जो भी हो मेरे फ़ोन ने चेन्नई वापिस आने के करीब एक हफ्ते बाद मेरी उँगलियों को फिर से पहचानना चालू  क र दिया है.
सोचा -बात आयी है- तो लिख डालूं।

प्रेम
जनवरी २७, २०१८


शुक्रवार, नवंबर 03, 2017