शनिवार, फ़रवरी 16, 2019

गुलों में रंग भरे............चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले


१. गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौबहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले क़फ़स उदास है यारों, सबा से कुछ तो कहो कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले चले भी आओ... जो हमपे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ हमारे अश्क तेरे आक़बत सँवार चले चले भी आओ... कभी तो सुबह तेरे कुंज-ए-लब्ज़ हो आग़ाज़ कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्क-ए-बार चले चले भी आओ... मक़ाम 'फैज़' कोई राह में जचा ही नहीं जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले चले भी आओ...

फ़ैज़  अहमद फ़ैज़  (Text Ref:   http://kavitakosh.org/kk/)

गायक:  मेहदी हसन    (रेशम के वाकिफ  मुलायम आवाज----परिवार १६ पुश्तों से  संगीत  साधना में   )
https://www.youtube.com/watch?v=aKwCwDPlOy8



२. रंजिश ही सही  (राग : यमन )
https://www.youtube.com/watch?v=dxv5U0F0nzw
रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ

पहले से मरासिम न सही, फिर भी कभी तो
रस्मों-रहे दुनिया ही निभाने के लिए आ

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ

इक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझको रुलाने के लिए आ

अब तक दिल-ए-ख़ुशफ़हम को तुझ से हैं उम्मीदें
ये आखिरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ..


(Ahmed Faraz)(Text ref:  http://kavitakosh.org/kk/)

Ranjish hi sahi dil hi dukhaane ke liye aa, (let it be anguish, come at least to hurt the heart)... Come to leave me gain...

३. एक और ग़ज़ल
https://www.youtube.com/watch?v=N-NkiHpE-wI

मंगलवार, जनवरी 15, 2019

छमा बड़न को चाहिये- Elders should learn to forgive..

The couplet of Rahim appears to make more sense now:


छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात 

कह रहीम हरि का घट्यो , जो भृगु मारी लात।

This is really interesting:

Elders must learn to forgive the nuisance created by youngsters (even at the work place).  The misbehavior of younger ones will be of similar value as a kick by an insect!

Other couplets of Rahim are given at this link



प्रेम , १५ जनवरी  २०१९.



बुधवार, जनवरी 02, 2019

नए साल की मुबारकबाद: एक पव्वा झिलमिल

नए साल की मुबारकबाद

व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी से एक वीडियो प्राप्त हुआ. जबसे उसे देखा है - इतना सजीव वर्णन मैंने किसी कविता में आज  तक नहीं सुना.  चाहे वह  "मुझे तोड़ लेना वनमाली! उस पथ पर देना तुम फेंक "  माखन लाल चतुर्वेदी की ये कविता ही क्यों  न हो.   आप भी  रसास्वादन करें. 

इस कविता या छंद के लेखक उच्चारक का नाम तो मुझे नहीं पता लेकिन गेहूं के पौधों की लम्बाई, धूप, और "गिंज" का उच्चारण ये इंगित करती है कि ये कवि  हमारे अल्मोड़ा जिले के होंगे.  यदि आप को इनका पता मिले (जैसे कि उस व्हॉटस्वैप मैसेज से आपको मिल सकता है- जो कि दिसंबर २०१८ के अंतिम सप्ताह में कुमाऊँ के कई जिलों में एक साथ प्रसारित हुआ यानि  'मैसेज वायरल हुआ "

"एक पव्वा झिलमिल  दो पव्वा टैट , तीन पव्वा ललबल  चार पव्वा फ्लैट |
पांच पव्वा गिंज आकाश, छै पव्वा एक सौ आठ - सात पव्वा घाट "

इस कविता की विधा भी एकदम अलग है- इसमें कवि  ने  "गागर में सागर भरने " वाला मुहावरा चरितार्थ किया है.

कविता के इस अंश को मैं उन कवि  से साभार लेते हुवे यहाँ जन साधारण के लिए टाइप कर रहा हूँ.  वीडियो मैसेज देना कवि  की निजता का हनन होगा.

यदि उसका अर्थ समझने में  मुश्किल हो तो- एक आध पेज लिखा जा सकता है- जब समय हो.

KEYWORDS : पिया शराब ,  नाली,  पाउच , कच्ची, अंग्रेजी, पव्वा , अध्धा,


प्रेम,  २ जनवरी २०१९. 

शनिवार, जुलाई 21, 2018

कलश Kalash

कलश


चम्पावत भ्रमण के दौरान एक सांसकृतिक  संस्था  के साथ रहने का मौका मिला। चम्पावत में  कुछ जानकार नागरिकों  (एवं आसपास के क्षेत्रों से नौकरी करने वाले साथियों ) ने एक संस्था की स्थापना की है. जिसका नाम है "कलश"  . कलश एक संगीत कला समिति है जिसके सदस्य वहां पर काम करने वाले , संगीत में रूचि रखने वाले संवेदनशील लोग हैं.  कलश कोई NGO  नहीं है।   इसका  उद्देश्य केवल संगीत एवं कला के क्षेत्र में कुमाऊँ  (अन्यथा सांस्कृतिक दरिद्रता के इस कठिन दौर में ) में इन कलाओं को जीवित रखना एवं जनसाधारण को प्रस्तुत  करने का है. सालभर करररीब १०-१२ बैठक अपने खर्चे पर आयोजित करते हैं.  उन्हीं मैं से एक की झलकियां हैं:

राखो मोरी लाज गरीब नवाज
https://www.youtube.com/watch?v=1SbBsL_hr5o

कलश के अन्य भजन 
https://www.youtube.com/channel/UCEtPYRuRheEpBZSBkzSUl-g

Duriing HOLI 2018 :
1. https://www.facebook.com/harish.pandey.3348390/videos/716527115401799/UzpfSTY4MTc4MDc1NzoxMDE1NjEyMzAwNzY0NTc1OA/

2. मुबारक मंजील फूलों भरी। . ऐसी होली जो खेंलें जनाबे अली.. 
 https://www.facebook.com/harish.pandey.3348390/videos/717924955262015/UzpfSTY4MTc4MDc1NzoxMDE1NjEyMjk4OTA1MDc1OA/

इसी बीच एक ट्रिप उन लोगों  के साथ पंचेश्वर   (-वो ही -जहाँ बाँध बनेगा) का   लगाया था।



शुभकामनाओं के साथ

प्रेम
जुलाई २१, २०१८

P.S. वा ह साहब क्या बात है. कलश- कुछ मुट्ठी भर  सांस्कृतिक रूप से सचेत नागरिकों का एक गुट है- जो संगीत मैं रूचि रखता है और संगीत को चम्पावत क्षेत्र मैं अपने बल बू ते पर बढ़ावा दे रहा है. उसके सदस्य अपने खर्चे पर संगीत का आयोजन करते हैं और आनद उठाते है।

शनिवार, जून 30, 2018

चम्पावती नदी

पता चला कि एक चम्पावती  (छोटी सी) नदी है जो आसाम में  बोंगाई गांव  में  ब्रह्मपुत्र नदी से मिलती है.

एक और नदी जो पूर्वी घाट से निकलती है. उसका नाम भी चम्पावती ही है।

https://en.wikipedia.org/wiki/Champavathi_River

शनिवार, जनवरी 27, 2018

Finger print verification: अंगूठे की कीमत

Finger print verification
अंगूठे  की कीमत
करीब एक साल पहले मैंने एक फ़ोन ख़रीदा. उसमें पासवर्ड की जगह एक ऊँगली के निशान  से चलने वाला बटन था. चेन्नई  में  रहते हुए जब भी मुझे फोन चलाना होता -मैं फट से फिंगर प्रिंट वेरिफिकेशन से फ़ोन चालू क र  लेता.

इत्तफाक से साल के अंत यानी दिसंबर २०१७  के दूसरे हफ्ते में हमें अपना मकान बदलना था. पिछले बीस सालों के दौरान इकठ्ठे सामान किसी तरह से इधर से उधर करने में  मेरी भी काफी मशक्क्त हुई।  मेरी क्या हुई मेरे हाथों की हुई. हालांकि मैने बिदेशी मजदूरों की तरह हाथ में दस्ताने भी पहने.  इसी दौरान जीजाजी की बरसी में चम्पावत जाना भी हुआ.  जहाँ का तापमान में धरती और शुक्र ग्रह का जैसा अंतर् था. शुक्र ग्रह का तापमान वगैरह यहाँ देखें (https://mars.nasa.gov/msl/mission/instruments/environsensors/rems/) ।  ये क्यूरोसिटी रोवर का कमाल है.

मैंने देखा -कि चम्पावत जाते जाते मेरे फ़ोन ने मेरे हाथों की उंगलिओं को पहचानने से इंकार कर दिया.  खैर फिलहाल नंबर वाले पासवर्ड को इस्तेमाल करता रहा. लेकिन इस बात से मेरा माथा ठनक गया.

बात सिर्फ इतनी थी कि या तो हाथों से काम  करने से या ठंड से फट जाने से मेरा मोबाइल फ़ोन -फिंगर प्रिंटस को पहचानने  में नाकामयाब रहा था.  आजकल इस तरह के फिंगर प्रिंट वेरिफिकेशन्स शोध संस्थानों या कंपनियों के बाहर लगे होते हैं ताकि आपके काम पर आने या जाने के समय की जांच हो सके. या कहें कि कौन आया -कौन गया ये पता रहे.  या ये कहिये कि अंदर जाने वाले ही जा पाएं, दूसरे नहीं.   ये फिंगर प्रिंट मशीनें या तो आधार संख्या पर चलती हैं या फिर आपके उँगलियों के   निशान एक बार  रिकॉर्ड कर लेती हैं.  इस तरह का वाकया  उन स्कूल के बच्चों के साथ - हो सकता है  जो  इम्तहान से  कुछ दिन पहले  (मेरी तरह से ) काम कर रहे  थे -और इस कारण से अपना  फिंगर प्रिंट वेरीफाई नहीं कर पाए .  मजदूरों के या कामगारों के साथ भी अक्सर  ये हो सकता है.   (इम्तहानों में तो ऐसे बच्चों की अलग से लिस्ट बन जाती है.).

जो भी हो मेरे फ़ोन ने चेन्नई वापिस आने के करीब एक हफ्ते बाद मेरी उँगलियों को फिर से पहचानना चालू  क र दिया है.
सोचा -बात आयी है- तो लिख डालूं।

प्रेम
जनवरी २७, २०१८


शुक्रवार, नवंबर 03, 2017

रविवार, जुलाई 23, 2017

Jag da- A memoir

July 22, 2017.
WhatsApp blipped with a message from Prof Tripathi that Jag Da is no more.  It was a shock as there was no news that he was sick. I have not met him since last 2 years due to extraordinary business. Dr. Jagdish Chandra Joshi was popularly known as Jagda in whole NainiTal-Almora area. He was a teacher-researcher in DSB college, Physics department.  He also carried out a big job of Warden ship of a big hostel of DSB college for long many years.

A fantastic experimentalist 

I was almost a second generation students of Jagda.  He retired a few years later I completed my M.Sc.  For instance had told us the alternate way of aligning a telescope in the 'angle of prism' experiment when I was completing my B.Sc. in 1983 in DSB College Nainital.  The  procedure explained in books had no connection with what he was explaining.  While viewing with his eye and keeping his big cheek on the instrument he tilted the whole spectrometer to focus at the window a bit far... Thats the way I have also been teaching it to B.Tech. students since last 20 years, and one can very well imagine how deep the impact of his teaching was (and How often I remembered him). Molecular Spectroscopy  Lab (now Photophysics lab) of NainiTal has several  instruments designed during his time.

Democracy in the hostel
Ask any one who had lived in Brook Hill Hostel- if he ever spoke roughly to any one.  He knew the attitude of the youngsters and knew very well how to manage a hostel like Brook Hill!   Later when I became the warden of an undergraduate hostel, I understood the difficulties and the responsibilities of Jag da during those days.


May the soul rest in peace.

Prem



गुरुवार, अप्रैल 06, 2017

निमित्त मात्रं


 आजकल अक्सर इस श्लोक की अंतिम पंक्ति याद आ जाती है.  इसलिए नहीं कि भगवान श्रीकृष्ण ये कहते हैं.अर्जुन से कि करने वाला मैं हूँ.तू खड़ा हो जा बस . बल्कि इसलिए, कि सारा कार्य तो मिल-बैठ के सबकी मदद  से होना है -- कर्ता  तो निमित्त मात्र के लिए है।

श्रीमद्भागवत गीता : अद्ध्याय ११ , श्लोक ३३:

तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व
जित्वा शत्रून् भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम्।
मयैवैते निहताः पूर्वमेव
निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्।।11.33।।

अक्सर "भयावह" स्थितियों में  शायद संस्कृत के श्लोक याद आते हैं.


अप्रेल ६, २०१७


रविवार, सितंबर 04, 2016

Light fedility or LI FI लाइट फेडिलिटी यानि लाईफाई

लाइट फेडिलिटी  यानि  लाईफाई (Li-Fi)

हाई फाई, वाई फाई  और अब लाईफाई
 लाईफाई-  ठीक  हाई फाई (hi-fi)  या वाई फाई (wi-fi or wireless fidelity) की तर्ज पर दिया गया नाम है. इसका सीधा सम्बन्ध  इन्टरनेट से है.   लाईफाई प्रकाश के इस्तेमाल से बनी इंटरनेट की एक नई तकनीक  नाम है।  इसका उपयोग इन्टरनेट के डाटा को लाने ले जाने के लिए किया जा रहा है- ठीक वैसे ही जैसे कि  वाई -फाई  राउटर करता है.

  एक पंथ  दो काज
आपको याद होगा कि  भारत में भी जनता को मुफ्त इन्टरनेट सेवा देने की बातें चलती रहती हैं.  फर्ज कीजिये कि सरकार गाँव -गलियों में लाइट  के लिए बल्ब लगा दे (ये बल्ब आधुनिक LED - हो सकते हैं) और -बिलकुल -  " एक पंथ  दो काज " वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए, उन्हीं बल्बों से इन्टरनेट का आदान प्रदान भी हो. आप इसे 'एक तीर से दो निशाने' भी कह सकते हैं.

प्राचार्य हेराल्ड हास 
 एडनबरा  विश्वविद्यालय के प्राचार्य हेराल्ड हास ये बताते हैं. उन्होंने एक  TED TALK भी इस सम्बन्ध में  दिया है. उन्होंने ये बताया कि  इन्टरानुसरित परिवर्तित किये गया  एक  LED बल्ब - "राऊटर " का काम करता है।  ये LED बल्ब एक यन्त्र से जुड़ा रहता है- जो कि इन्टरनेट से जुड़ा रहता है. इंटरनेट डाटा-इस यन्त्र के माध्यम से बल्ब में जाते हैं. 
 बल्ब का प्रकाश जहाँ -जहाँ पहुच पता है- वहां तक इन्टरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है.  उस तरफ एक रिसीवर  (यानि) डोंगल उस प्रकाश को कंप्यूयर या मोबाइल फ़ोन तक पहुचा देता है.

संवेदनशीलता:
चूँकि  प्रकाश की आव्रत्ति १० की घात १४ होती है - यह वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली तरंगों के १० की घात ०९ के मुकाबले कम से कम दस हजार गुना तेज होगी.  यानी  इंटनेट स्पीड काफी अच्छी.
http://www.nature.com/articles/srep18690

बस इन्तेजार कीजिये लाईफाई का.  जो कि बस   आने ही वाला है. 

प्रेम 
सितंबर ४, २०१६ 



सोमवार, अगस्त 15, 2016

चीनी कहावतें : Interesting chinese sayings

चीनी कहावतें :
साभार :  https://goo.gl/zVZPU6

१,  असहिस्णुता बड़ी बड़ी  योजनाओं का बन्टाधार कर सकती है।
२. हजारों मील लंबी यात्रा की शुरुआत एक  कदम से होती है.
३. अगर आपको झुकना ही पड़े तो कम झुको.
४. एक छोटी सी मुस्कराहट से आप के जीवन को  दस बरस मिल सकते हैं.

5. A bird does not sing because it has an answer. It sings because it has a song.

6. A book holds a house of gold.   किताब में  सोने की खान होती है.

7. Talk does not cook rice.   बोलने से (खाली बकवास करने से) खाना नहीं पकता है /
8. Experience is a comb which nature gives us when we are bald. जब हम गंजे हो जाते  हैं,  प्रकृति हमें एक अनुभव रूपी कंघी देती है।

9.Be not afraid of growing slowly, be afraid only of standing still.

10. Behave toward everyone as if receiving a guest. सबसे ऐसे व्यववहार करें, जैसे आप मेहमान से मिल रहे हैं। 
11. A fall into a ditch makes you wiser.  धोखा खाने से मनुष्य बुद्धिमान बनता है।

12. Better a diamond with a flaw than a pebble without one.  अगर हीरे में  खोट है तब भी वह एक कंकड़ से अच्छा है.
13. He who asks is a fool for five minutes, but he who does not ask remains a fool forever. प्रश्न पूछने वाला कुछ देर के लिए बुध्धू  है, लेकिन न पूछने वाला जीवन भर।

14. An inch of time is an inch of gold but you can't buy that inch of time with an inch of gold. क्षण भर  समय रत्ती भर सोने के समान है, लेकिन आप रत्ती भर सोने से क्षण भर  समय नहीं खरीद सकते.
15. A closed mind is like a closed book; just a block of wood. बन्द दिमाग एक बन्द किताब  की तरह है- ठीक एक लकड़ी के गुटके की तरह.

मजे की बात है कि पुरानी  कहावतों में  इतनी बार किताब का जिक्र आता है, समय न बर्बाद करने का, बुद्धिमानी का भी।   

शुक्रवार, जून 03, 2016

आधुनिक संचार के पितामह क्लॉड शनान

आधुनिक संचार के पितामह क्लॉड शनान (Claude Shannon)

क्लॉड शनान ने १९४८ में  गणित में  संचार का एक ऐसा आइडिया [१] दिया जिससे आजकल की डिजिटल संचार ब्यवस्था की नीव रख दी.  कई दशकों (यहाँ तक  कि मृत्यु तक ) तक उन्हें बहुत लोग नहीं जानते थे.
जैसे गुरुत्वकर्षण के नियमों के लिए न्यूटन का योगदान है- ठीक वैसे ही आधुनिक संचार में शनान का योगदान मान जाता है.

१९४० के आसपास जब टेलीफोन , टीवी , टेलीग्राम टेलेक्स आदि संचार के माध्यम अलग अलग तरह से काम करते थे , शनान ने इन सबको एक ही थाली के चट्टे - बट्टे बता कर एकाकार  कर   दिया।  उन्होंने ये भी बताया कि  इन सबका यूनिट एक बिट है।   'बिट' का इस्तेमाल शनान ने पहली बार किया था १९४८ में।  उन्होंने इनपुट 
एवं आउटपुट की सीमाओं को भी तभी तय क्र दिया।   जैसे आप यदि किसी कैमरे से फोटो का डिटेल लेना चाहें तो आप एक सीमा से आगे नहीं जा सकते.  फोटो  धुंधली हो जायेगी - इसको आप शनान सीमा कह सकते हैं. ठीक वैसे ही- आपकी इंटरनेट की स्पीड या फिर मोबाइल के सिग्नल  आदि आदि- सब शनान सीमा में  काम करते हैं.

उनकी जन्म शताब्दी (१९१६) मनायी  जा रही है।  उन्होंने संचार थ्योरी , डेटा संकलन , डिजिटल कम्प्यूटर , डेटा सुरक्ष्या , कृत्रिम बुद्धि तथा सर्कस में दिखाई जाने वाली जगलिंग  पर काम किया।

[information theory , data compression, digital computers , cryptography, and juggling, as well as laying foundations of artificial intelligence] .

एक लिंक
http://www.itsoc.org/resources/Shannon-Centenary

एक वीडियो
https://www.youtube.com/watch?v=z2Whj_nL-x8


[१]. C. E. Shannon, "A Mathematical Theory of Communication," Bell System Technical Journal, vol. 27, pp. 379–423, 623–656, 1948.

प्रेम , जून ३, २०१६

शनिवार, मई 21, 2016

Mark Twain मार्क

Quote of Mark Twain:

The following is believed to be said by Mark Twain:

"When I was a boy of 14, my father was so ignorant I could hardly stand to have the old man around. But when I got to be 21, I was astonished at how much the old man had learned in seven years." — Mark Twain

मार्क TWAIN  का  एक  तथाकथित कथन :

"जब मैं  १४ साल का था, मेरे पिताजी  बहुत सारी  बातों  से  इतने  अनजान  थे  कि  मुझे  इन बुजुर्ग  का आसपास  रहना अच्छा नहीं  लगता था।   लेकिन मैं   जब  २१ साल का हुआ  तो मुझे इतना आश्चर्य  हुआ  कि इन्होने पिछले ७ सालों में  कितना कुछ सीखा है " . - मार्क 

असल में  पिताजी  की नहीं , बच्चे की समझदारी बढ़ी तो उसे पिताजी ज्यादा जानकार लगने लगे. 

प्रेम 
२१ मई २०१६