मंगलवार, मई 19, 2020

चरण पादुका : भरत और प्रवासी: लाक डाऊन (lock down) का चौथा चरण (मई १८ से ३१ , २०२०)

चरण पादुका : भरत और  प्रवासी

लाकडाऊन  (lock down) का चौथा चरण (मई १८ से ३१ , २०२०) भारत में  लागू हो गया है |  इस दौरान जो सबसे बड़ी बात निकल कर आयी है वह है :  प्रवासी मजदूर -   किसी को भी इस बात का अंदाज नहीं था कि  आज के भारत में लोग कैसे अपनी जीवन चर्या का यापन करते हैं |   कोरोना महामारी ने ये बात सामने ला कर खड़ी कर दी है कि भारत की अर्थव्यवस्था की  इकाई असल में ये छोटे-छोटे व्यापारी- उनके साथ काम करने वाले दिहाड़ी लोग- या फिर सुबह या शाम साईकिल से दसियों किलोमीटर तक काम करने जाने वाले लोग हैं |
मुझे याद आ रहा है -जब एक या दो दिन का "बंद" या भारत बंद का आह्वान होता, तो सबसे पहले उन  लोगों की याद आती जो रोज कमाते -खाते हैं |  लोग खा तो अपने गाँव में  भी लेते- लेकिन बच्चों की अच्छी पढ़ाई के लिए या छत पर घास के बजाय पक्का लिंटर डलवाने के वास्ते ये लोग अपने घरों से दूर बहुत दूर तक काम की तलाश में  आ गए |

पहले लाकडाऊन में  तो किसी को कोई अंदाज ही नहीं हो पाया कि करना क्या है |  ये महामारी भी ऎसी कि  इतनी तेजी से -सांस के रास्ते से  या  हाथ को मुंह पर लगाने से ही फ़ैल जा  रही है | तो  लॉकडाउन - पर - लॉकडाउन के होते होते -आज हम चौथे चरण में  पहुंच गए |   बस , ये ही वो बात है- जिसके लिए कोई भी तैयार नहीं था - बिलकुल नहीं |  रोज कमाने वाले लोग तो कत्तई नहीं |  उनके पास जो कुछ बचा था वो ख़तम हो चुका है |  नौकरी के वापस मिलने के फिलहाल तो कोई आसार नजर नहीं हैं |  घर से बात हो भी गई तो वहां भी दिक्क्त है |  कुल मिलाकर ये लोग अब घर जाना चाहते हैं ताकि सबके साथ मिलबैठकर कुछ और मेहनत  करने की सोचे |


ये नक्शा एक वेबसाइट से  २० मई २०२० को ३ बजे के करीब लिया गया है
https://dp.observatory.org.in/content/migration-route-covid-19
इसमें प्रत्येक डॉट १००- से ५०० तक के प्रवासी मजदूरों  के एक क्लस्टर को दिखाता  है

अब सरकारों ने बसों का, रेलों का  (श्रमिक एक्सप्रेस ) इंतजाम किया है -तो कोइ पैदल ही चला जा रहा है - १००  किलोमीटर,  २००, ३००, ५००, १००० किलोमीटर तक|  रास्तों में  कई शहर पड़ते हैं - वहां  की पुलिस लाकडाऊन  करने के लिए इन लोगों को भी कहती है कि अंदर जाओ.  लेकिन कहाँ?  किसी तरह से बचते- बचाते - रेल पटरियों पर चलते -चलते ये लोग अपनी कई सौ किलोमीटर की सड़कों को नापते हैं|   दो- दो- दिनों तक सिर्फ बिस्किट पर |  इसी बीच बहुत सारे लोगों ने अपने पास के गावों से गुजरने वाले मजदूरों के लिए पानी, खाने का इंतजाम किया है |

इधर पता लगा है कि  १ जून से हर रोज करीब २०० रेलगाड़ियां सिर्फ इन्हीं प्रवासियीं के लिए चलाई जाएंगी.

इन दिनों टेलेविजन पर  चलते लोगों के हुजूम देखना- उनकी तरह तरह की कहानियों को ट्विटर पर पढ़ना एक आम बात हो गयी है | जानकार लोग बता रहें हैं कि ये विस्थापन १९४७ के विस्थापन से भी कहीं बड़े स्तर  पर है|

भारत इस समय  कोरोना  वायरस की महामारी की वजह से  स्वास्थ्य आपातकाल    (health emergency)   से  कम,  किन्तु  "प्रवासी मजदूरों के  आर्थिक संकट    ( economic hardship)"  से ज्यादा  जूझ रहा है |  एक-एक रेलगाडी  में करीब १२०० लोग आते हैं - लेकिन रेल की खबर लगते ही कई हजार लोग स्टेशन पर पहुंच जाते हैं - ऐसे में  सामाजिक दूरी  (social distancing) की बात मिलकुल बेमानी हो जाती है | इस समस्या का समाधान सभी करना  चाहते हैं- सरकारों ने कई लाख लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचा दिया है -लेकिन समस्या इतनी विकराल है - ऐसा लग रहा है जैसे -"ऊंट के मुँह में  जीरा "  |  देखते हैं कैसे हम इस सबका हल निकालते हैं ?

चरण पादुका (charan paduka, footwear for migrants):

इसी बीच चलते -चलते जब लोगों के , उनके बच्चों के पैरों की चप्पलें पूरी घिस गयीं - ऐसे में , तपती धूप और ४० डिग्री के तापमान में  चलते इन लोगों को देखकर मध्य प्रदेश की पुलिस ने एक नायाब तरीका निकाला |  आकाशवाणी के अनुसार पुलिस ने करीब १५००० रुपये अपने आप  इकठ्ठा करके ढेर सारे जूते चप्पल खरीद  के उन चलने वाले लोगों को मुफ्त में  बांटना शुरू किया - इसे इन्होने " चरण पादुका अभियान " का नाम दिया है |

अभी तक मैं चरण पादुका का सम्बन्ध सिर्फ रामायण के भरत और राम से ही जोड़ता था |  लेकिन अब ये मेरे जीवन का एक अति संवेदनशील जीता-जागता शब्द बन गया है |

इस चरण पादुका  अभियान को काफी समर्थन मिला है और तमाम NGO  इस कार्य को कर रहे हैं |

मई १९ तक भारत में  १ लाख से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं और  ३ हजार के करीब लोग इस बीमारी  से मर चुके हैं  अभी तक ३९००० लोग ठीक हो चुके हैं |  विश्व भर में पिछले ५-६ महीने में   ३ लाख से ज्यादा लोग मर चुके हैं |

इसी आशा के साथ कि  जल्द से जल्द इस बीमारी पर काबू पाया जाएगा :

प्रेम   मई   १९, २०२०








सोमवार, मई 11, 2020

Relaxations during :Lockdown 3 in India and related events

Relaxations during :Lockdown 3 in India
3rd Phase of lockdown (May 4-17) saw a number of relaxations to the public such as opening shops for a longer time in non-containment zones (green zones) and bringing strnded Indians abroad by special flights, running Shramik Spacial trains to ferry stranded migrant workers in India. One of the painful sights these days is to see a large number of migrant workers walking towards their home town as they are left with not much money for survival and they wish to at least reach back their own home with a shelter. A large number of stories have  surfaced about the migrant worker crisis.

The number of cases went up in Chennai suddenly due to a vegetable market (Koembedu). the market was closed and has now been shifted to another place with proper arrangements. There was some crisis of vegetables during last one week. The very essential item such as green coriander and green chillies were not available, nor were the oranges.


In any case, there are other side of the story related to opening of "other" shops. Those shops apparently contribute to the large mount of money to the government and were closed since March 24th 2020.  These shops attaract large nbumber of people irrespective of their identity.  Therefore a long Q's without social distancing were seen. Finally the court had to close the shops the next day followed by the governement requesting again to open it and so on.

The world chart of deaths due to Covid19 on 27th April showed the following picture



Prem
May 11, 2020





मंगलवार, मई 05, 2020

शहरों के हॉटस्पॉट्स: Hot spots/ containment zones of some cities in India

आज भारत में  सबसे ज्यादा करीब ३९०० कोविद के केस देखने को मिले.  साथ ही सबसे ज्यादा मौतें भी (२००).

कुछ शहरों  के हॉटस्पॉट्स नीचे दिए गए लिंक में  दिए गए हैं

 Hot spots/ containment zones of some cities in India

https://www.covidhotspots.in/

मई ५, २०२०

प्रेम 

सोमवार, मई 04, 2020

लॉक डाउन का तीसरा पक्ष (4 May to 17th may 2020)


कोरोना से सम्बंधित एक और पोस्ट : 

भारत में लॉक डाउन का तीसरा पक्ष चल रहा है (मई ४ से १७ तक )|  लाल, नारंगी और हरे क्षेत्र बन गए हैं .   कोरोना के साथ जीना सीखना है |  वैक्सीन बनने में  अभी ८  से १०  महीने लगने का अनुमान है |  जल्दी से जल्दी अगले साल के शुरुआत में शायद बाजार  में  आ जाये |

कोरोना महामारी ने दुनियां को जीने का नया तरीका जरूर सिखा  दिया है |  वो ऐसे कि  आप यदि हरे क्षेत्र में  हैं, तभी आप सभ्य हैं -अन्यथा आपको आपकी दौलत मुबारक |  साथ ही अंधी दौड़ पर शायद लगाम भी लगे |  सिर्फ अधिक से अधिक फायदे के चक्कर में जी रहे देश अब वापिस अपनी औद्योगिक संरचना को बदलने की तरफ जा रहे लगते हैं |  यूरोप को डर  लग रहा है कि बड़ी बड़ी डींगें हांकने वाला अमरीका जब घुटनों के बल पड़ा है- क्या नए संसार में उसकी भूमिका कहीं बदल तो नहीं रही?

विदेश भ्रमण पर निकले लोग अब  'उस' नजर  नहीं देखे जा रहे| लोग दूर रहना चाहते हैं |

बड़े -बड़े  बायोटेक्नोलॉजी के यहाँ से सीधे ब्रमांड की डींगें हांकने वाले शोध संस्थान, नेचर तथा साइंस से कम बात ना करने वाले वैज्ञानिक-सब  धरे के धरे रह गए.

 बड़े बड़े देशों की स्वास्थ्य पालिसी मुंह के बल जा पड़ी |  दुनियां भर के लोग इस समय डाक्टरों के पास जाना भूल गए |   जो गए भी उन्हें डाक्टर लोग बचा नहीं पाए ( इर्र्फान और चिंटू इसी बीच हमारे बीच नहीं रहे ) |  अस्पताल जैसे अपने क्ष-रे  MRI  मशीनों के लिए मेंटेनेंस खर्चा भी नहीं उठा पा रहे |  सारे एक्सपर्ट पता नहीं कहां गायब हो गए सीन से |

प्रेम  मई ४, २०२० 

Automatic folded house स्वचालित तह किया हुवा घर

स्वचालित तह किया हुवा घर
Automatic folded house

ब्रिटेन की एक कंपनी  टेनफोल्ड इंजीनियरिंग  (https://www.tenfoldengineering.com/) ने यु बॉक्स (UBOX) नामक  करीब १ करोड़ रूपये  में  मिलने वाले ऐसे घर  बनाये  हैं, जो कि मोड़ कर ट्रक में  लादकर कहीं भी ले जाए जा सकते हैं |  आज के इस जमाने में , जहाँ किसी व्यक्ति को यदि तुरंत किसी ऐसे जगह पर ऑफिस की जरुरत है, तो इस तरह के बने बनाये मकान काफी मददगार साबित हो सकते हैं |  या फिर दूर पहाड़ों पर गर्मियों के दौरान ढेर सारे घर जहाँ टूरिस्ट आ कर रह सकें , इत्यादि इत्यादि |

 ऐसा लगता है कि एक बड़ी समस्या ये होगी कि इसकी  देख रेख |

ये घर १० मिनट के अंदर अपने आप खुल कर बन जाते हैं  -या बंद - जरूरत हो तो सिर्फ एक बिजली के कनेक्शन की |


प्रेम  मई ४, २०२०