रविवार, दिसंबर 02, 2012

Couplets of Kabir (कबीर के दोहे)

Kabirdas has been relevant more than even when he wrote these couplets.  I am trying to collect some of them (mostly from internet, till I get a text book).  Some of the Hindi  version is my effort, as roman character does not give the real feel:


१. कबीरा  खड़ा बाज़ार  में , मांगे सबकी  खैर
ना काहू  से  दोस्ती ,ना  काहू  से  बैर ।

२. साईं  इतना  दीजिये , जामे  कुटुंब  समाये
 में भी  भूखा  ना  रहूँ , साधू  न  भूखा  जाए.

३. कबीरा खड़ा  बाज़ार  में  लिए  लुकती  हाथ,
जो   घर  अपना  फूंक  दे  चले  हमारे  साथ ।
[Ref:  अभी तो आग चाहिए हमारी इस कुटिया को -? HELP -आशु - पूरा करें]


४. चिंता  ऐसी  डाकिनी , काट  कलेजा  खाए ,
 वैद बिचारा  क्या  करे, कहाँ  तक  दवा  लगाए ।

5. मूरख संग  न  कीजिये, लोहा  जल  न  तिराय,
 कदली,  सीप,  भुजंग मुख,  एक बूँद  तिहु  भाई.

6. जैसे  तिल  में  तेल  है , ज्यों  चकमक  में  आग,
 तेरा  साईं  तुझ  में  है , तू  जाग  सके  तो  जाग.

7. पाहन पूजे हरी मिलें, तो मै पूजूं पहाड़,
वा ते ता चाकी भली, पीसी खाय संसार।।
Worship- thats great-

8. कंकड़ पाथर जोड़ के, मस्जिद लयी बनाय,
9. माला फेरत जुग गया, गया न मन का फेर,


-काल करे सो आज कर, आज करे सो अब,
पल मैं परलय होएगी, बहुरि करोगे कब?
Do not try to delay things.

Following few are posted here with the courtesy Twitter ( by Debang)

10. कबीरा मैं तो तब डरौं, जो मुझ ही में होय,
 मीच बुढापा आपदा, सब काहु में सोय।

11. ऐसा कोई ना मिला, समझै सुने सुजान,
ढोल दमामा ना सुने, सुरत बिहूना कान ।


12. कबीरा गर्व न कीजिये, ऊंचा देखि आवास,


 काल परी भुंइ लेटना, ऊपर जमसी घास। 


------------- randonly remembered---------
13. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं.


14. पोथी पढ़ -पढ़ जग भय, पंडित भय न कोही.


15. बुरा जो देखन में चला, बुरा न मिलया कोय,
 जो मन खोजा आपणा, तो मुझसे बुरा ना कोय।

 16. करता था सो क्यों किया अब क्यों कर पछताए
       बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाए l
Must do some thing good to be appreciated later.

17. माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंधे मोय
एक दिन ऐसा आयेगा, में रौंधुगी तोय (Aug. 10, 2013- courtesy-Twiitter; Debang)

18. मसि कागद छुयो नहीं, कलम गही नहीं हाथ.
Apparently Kabeer did not write,  his friends/students kept on noting them down (for us).

19. सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं.

20. ढाई आंखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय.

21.  धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घढ़ा, ऋतू आये फल होय।
Do not panic. (Things take their time anyway. Relax).

22. मरि जांऊ मांगू नहीं, अपने तन के काज 
परमारथ के कारने, मोहि न आवै लाज 
( I may die but won't beg,  For charity, will beg without shame)

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