गुरुवार, जुलाई 22, 2010

नैनीताल समाचार से साभार

नीचे दिया गया पैरा नैनीताल समाचार (१-१४ जून, २०१०) से लिया गया है। सन १३०० के आसपास की बात है!

...................यहाँ एक भारी भरकम ताम्रपत्र था, जिसे तत्कालीन जिला मुख्यालय अल्मोड़ा में मँगा लिया गया था। भूमिदान से सम्बन्धित था इस ताम्रपत्र की प्रतिलिपि मंदिर के पुजारी के पास है। यह इस प्रकार है:- ‘‘कल्याण हो। श्री षाके 1345 उत्तरायण में पौर्णमासी के दिन फल्गु नक्षत्र आषाढ़ के अन्त में इस पृथ्वी पर चूंड़ामणि की भाँति जिसके युगपद सुषोभित हैं, उसी राजा के द्वारा चम्पावती कुमञां में कुन्ज को भूमि दी गई । यह ब्राह्मण जो मायासेरी का उपभोग करता आ रहा है, वह प्रसन्न हो गया। राजा विक्रमचंद्र दान देने में कल्पवृक्ष की भाँति होवे। यह भूमि पूर्व में उदारमना राजा क्राचाचल्ल द्वारा दी गई थी। यह भूमि दुष्ट लोगों के उपद्रवों से न छीनी जाए, इसलिए इसका जीर्णोद्धार कर दिया गया इत्यादि। इसके साक्षी हैं, रूदु चौंकियाल, प्रभु बीष्ट, जनु महुणि इत्यादि।’’
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