शनिवार, जुलाई 25, 2009

हिल्लोरी बाबा हिल्लोरी

हिल्लोरी बाबा हिल्लोरी
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हिल्लोरी बाबा हिल्लोरी,
आमा कौन्छे बाबा पांढ में छे।
की करेनेच्चे?
पूरि पक्कुने।
एक पुरी मी दे ,
काच्चेवे छ।

भाढ़ मै है कव्वा छुट्यो
ढुन ढुन ढुन ढुन

बच्चों के लिए : पढ़ना सुखदायी, bachcho padhna hai sukhdayee

बचपन की सुनी ए़क और चौपाई:

bachcho padhna hai sukhdayee
mile isee se tumhen badhaai
pahle thoda kasht utho,
fir sab din aanad uthao.

बच्चो पढ़ना है सुखदायी , मिले इसी से तुम्हें बढ़ाई।

पहले थोड़ा कष्ट उठाओ, फ़िर सब दिन आनंद उठाओ।

Children, studies will bring happyness.
During studies you undergo hard work-
but later you enjoy -always.


:हिंदी hindi poems for children:

रविवार, जुलाई 19, 2009

संस्कृत के श्लोक

कुछ श्लोक बच्चों के लिए इकट्ठे किए हैं, पेश हैं:
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न चौर हार्यम न च राज हार्यम, न  भ्रात्रभाज्यम न च भारकारी
व्यये कृते वर्धते नित्यं, विद्या धनं सर्वधनं प्रधानम् ।१।

काक चेष्टा बकोध्यानम, स्वान निंद्रा तथैव च
अल्पहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पञ्च लक्षणं । २।

विद्या ददाति विनयम, विनयात याति पात्रत्वाम
पात्र्त्वात धनमाप्नोति, धनात धर्मः ततः सुखं । ३।

नैनं छिदंति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः,
न चैनं क्लेदयन्त्यापो, न शोषयति मारुतः। ४।

कर्मनेवाधिकरास्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफल हेतुर्भुर्मा, ते सन्गोत्सवकर्मनि। ५।


यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति  भारतः,
अभुथानाम धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्हम।६।
( श्लोक नम्बर ४, ५ एवं ६ श्री मद्भाग्वात्गीता से हैं )

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , मा कश्चित् दुःख भाग्भावेत । ७।

गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णू गुरुर्देवो महेश्वर|
गुरु साक्ष्यात परब्रहम्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः||

The teacher is considered to be a special person!

3. Twameywa maata chh pita twamewa, twmeywa bhadhu sch sakha twamewa
twameywa widya dravidam twameywa, twameywa sarwam mam dev deva.

त्वमेव माता  च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव|
त्वमेव विद्या द्रविडं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देवो ||

How teacher is considered as a friend, like parents and actually everything during the training.  In constant touch with the development of the personality.

सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी ।
विद्यारम्भं करिस्यामि सिध्दिर्भवतु मे सदा ॥
(Generally, used while starting learning a musical instrument)

न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं, न मन्त्रो न तीर्थो न वेदा न यज्ञ ।
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता, चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ।।

This appears like a  modern shloka -very critical of life.  It is (one of 6 stanzas)  known as Atmashtakam.
http://en.wikipedia.org/wiki/Atma_Shatkam

Keywords: for search in Roman:

kaak chesta bako dhaanam

n chor haryam

Sarve bhawantu sukhinh

yada yada hi dharmasya

Guru Brahmma Guru Vishnu

twamewa maata cha pita twamewa

http://champawatsechennaitak.blogspot.in/2013/10/sanskrit-slokas-for-children-for.html



विद्या बाटने से बढती हैं: पढो और पढाओ

न चौर हार्यम न च राज हार्यम,
न भ्रात्रभाज्यम, न च भारकारी
व्यये कृते वर्धते नित्यं,

विद्या धनं सर्वे धनं प्रधानम् ।

Education is top rated economy.  This is so  as it is neither stolen by any one, nor can be divided in a family, nor can be taxed by the state.  Actually this is the only type of money- that multiplies when distributed (teaching something helps the knowledge of the teacher).

विद्यार्थी के गुण, Characteristics of a student! Vidyarthi ke gun

काक चेष्टा, बको ध्यानं,
स्वान निद्रा तथैव च । 
अल्पहारी, गृहत्यागी,
विद्यार्थी पंच लक्षणं ।। 


Kak chesta bako dhyanam!
Kaak cheshta bako dhyanam,
Swan nindra tathaiwa cha
Alpahari, grihtyaagi,
Vidyarthi panch lakshnam.

Also see this

संस्कृत के श्लोक

http://champawatsechennaitak.blogspot.in/2009/07/blog-post_696.html

[Searches may include Kag chestha bago dianam, vidhyarthi panch lakshnam, laksnam
Vidyarthi ke gun, Vidhyarthi ke Gun,  AAdarsh viddyarthi,  Adarsh Chhatr]


Efforts should be similar to a crow, (Repetitive,  remember story of a crow trying to drink water from a pot- while placing pieces of stones to raise the water level)
Focus on the work like a crane,
Take alert naps (sleep) similar to that of a dog;
A student should have these characteristics besides
s(he) should eat a bit less and  as far as possible, stay away from the sweet home (say in a hostel)!

-In addition, there is one more motivating poem:
-बचपन की सुनी ए़क और चौपाई:

bachcho padhna hai sukhdayee
mile isee se tumhen badhaai
pahle thoda kasht utho,
fir sab din aanad uthao.

बच्चो पढ़ना है सुखदायी , मिले इसी से तुम्हें बढ़ाई।
पहले थोड़ा कष्ट उठाओ, फ़िर सब दिन आनंद उठाओ।

Children, studies will bring happyness.
During studies you undergo hard work-
but later you enjoy -always.

बुधवार, जुलाई 15, 2009

Various scholarship links

I found the following sites, which may be useful for the students, academicians in the country.
1. http://www.scholarshipsinindia.com/awards_competitions_in_india.html

2. http://www.ucost.in/sciencecongress.html


Best wishes, Prem

शनिवार, जुलाई 04, 2009

गेलकी भी गिर जाए तो गिरने दो! Gelki bhi gir jay to girne do

बचपन की ढेर सारी वो कहानियाँ जिनसे ऐसा लगता है कि में प्रभावित हुआ, उनमें से कई सारी माँ ने दाल-भात के पकने के लिए इंतजार करते समय (अक्सर कच्ची या भीगी हुई लकडिया खाना पकाना दूभर कर देती थी) कई-कई बार सुनाई थी। पेश है उनमें से ए़क:
हमारे नाना जी टनकपुर में उचौली गोठ ( Ucholigoath) में रहते थे। बात उन्ही दिनों कि है जब जिम कार्बेट  (Jim Corbette) कुमाऊ नरभक्षियों  (Man eaters of Kumaun) का शिकार कर रहे थे। आम लोगो को भी कभी कभार जंगली शिकार हाथ लग जाता. ए़क बार ऐसे ही कहीं शिकार भात खा रहे थे कि ए़क बाबाजी आ गए। 'नमो नारायण बाबा जी' कहने के बाद नाना जी ने उन्हें भात खाने के लिए आमन्त्रित किया। बाबा जी कुछ सब्जी के साथ भात खाने लगे, किंतु बाकि लोगों को शिकार देखकर उनका मन ललचा गया।
मनः स्थिति भांप कर नाना जी ने बाबा जी से पूछा : "आप भी लेंगे क्या?"
बाबाजी बोले: "अच्छा थोड़ा रस-रस छोड़ दो "
नानाजी ने करछी से सावधानी पूर्वक रस देने की कोशिश करी।
बाबाजी ने कहा : " बेटा गेलकी भी गिर जाए तो गिरने दो"
नानाजी ने कुछ बाबाजी की थाली में टुकड़े भी डाल दिए। बाबाजी ने खूब चाव से खाया और विदा ली।
-प्रेम, जुलाई ४, 2009