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गुरुवार, नवंबर 11, 2010

उनको प्रणाम!

बड़ी संवेदनशील कविता है. बाबा की।
जरा आप भी अपने उन पलों की याद में खो जाए, जिनको इसमें इंगित किया है:

लिंक ये है। सधन्यवाद (अशोक से)

http://kabaadkhaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_473.html

प्रेम
११ नवेम्बर २०१०