गुरुवार, जून 25, 2020

कोविद प्रकोप संबधी 20 बातें: 20 terminologies regarding Covid19


कोविद प्रकोप संबधी 20 बातें
20 terminologies regarding Covid19

1.     एपिडेमिक ( Epidemic)
एक बीमारी जो एक ख़ास स्थान, वर्ग विशेष या शहर में एक उम्मीद की हद को पार कर जाय और उसके प्रकोप से बहुत सारे लोग एक साथ बीमार होने लगें,  उसे एपिडेमिक ( Epidemic) कहा जाता है |  ऐसी  बीमारियाँ सामान्यतया सरने (फैलने)  वाली होती हैं |  जैसे जुकाम , खांसी या एक ही शब्द में कहें तो फ्लू | ऐसा  फ्लू जो पहले नहीं आया |  संसार के लोगों में इस तरह का जुकाम पहली बार पाया गया – इससे पहले यह चिड़िया या |अन्य जानवरों में बहुतायत में था |
हालाँकि इस तरह के "नए जुकाम" भी उसी कहावत से ठीक होते हैं “दवाई खाओ तो 7 दिन में, दवाई न खाओ तो भी 7 दिनों में ही ठीक होगा” | हालाँकि कोविद १९  को ठीक होने में  करीब ११ से १४ दिन लगते हैं, यदि आपने अपना धान रखा है और समय पर पता चल जाता है |  लेकिन यदि वो लोग जिनको हधुमेह या ह्रदय की बीमारियाँ हों, उन्हें इससे संभालने  में मुश्किल होती है क्योंकि मानव शरीर का  तंत्र अजीबोगरीब तरीके से "रक्षात्मक" होने की कोशिश करता है| यह  अचानक किया  गया  रक्ष्यात्मक प्रबंध स्वास्थ्य प्रणाली को गड़बड़ा  देता है |
एपिडेमिक  से कस्बों , शहरों का स्वास्थ्य विभाग इतने सारे बीमारों के लिए आवश्यक दवा-दारू का इंतजाम कर पाने में एकदम असमर्थ पाता है |  इसलिए  एपिडेमिक से लोगों की थोड़ी सी अवधि में मृत्यु भी हो जाती है| इसलिए एपिडेमिक बड़ी बीमारियों में गिनी जाती है | कोविद१९ जब चीन के वुहान शहर तक सीमित था तब उसे एपिडेमिक कहा जा सकता था |  इनसे बचने का एक सबसे बड़ा बचाव है –शहरों में जनजीवन पूरी तरह से बंद करना यानी -लॉक डाउन | जिन लोंगों ने २०२० में होशोहवाश संभाला होगा- भला वो इसे कैसे भूल सकेंगे |

2.     महामारी (Pandemic)
"महामारी" एक ऎसी बीमारी  (epidemic) है,  जो कई सारे समूहों और महाद्वीपों में एकदम फ़ैल जाये -वह महामारी (Pandemic) का रूप ले लेती हैं | इतनी जल्दी कि अस्पतालों में जगह कम पड़ जाए और डाक्टर -नर्स (स्वास्थकर्मी) अपनी ड्यूटी करने में  भी तमाम एहतियात बरतें -जिससे बीमारी से लड़ने में और भी दिक्क्तें आएं |  सामान्यतया अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस तरह की बीमारियों को महामारी घोषित करता है |

3.     वक्र समतलता (Flattening the curve): इसके बारे में पिछली पोस्ट (२२ मार्च या 12 अप्रैल २०२० )  में बताया है| 
4.     झुण्ड प्रतिरोधकता (Herd immunity) : इसके बारे में पिछली पोस्ट में बताया है
5.     एंटी बोडी टेस्ट (Antibody test) :  इसके बारे में पिछली पोस्ट में बताया है

6.     PPE personal protective equipment : स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा पहने जाने वाले मास्क, दस्ताने इत्यादि जो की बीमारी के बेक्टेरिया वायरस से पूरी तरह से सुरक्षित रख सकें | 

7.     RO (आर नाट):   यह प्रजनन संख्या का सूचक है | यह एक संक्रमित व्यक्ति द्वारा संक्रमित किये गए व्यक्तियों की संख्या को दर्शाता है |  जैसे यदि RO=2 है तो इसका मतलब है कि  एक संक्रमित व्यक्ति दो और लोगों को संक्रमित कर रहा है |  यह संख्या ये बताती है कि क्या ये बीमारी  निकट भविष्य में सामूहिक फैलाव  के जरिये महामारी का रूप लेगी या नहीं |

8.     फैलाव (Transmission ): बीमारी फैलने के तौर तरीके – जैसे बार बार हाथ को नाक –मुंह के आसपास ले जाना |  हाथ मिलाना , गले मिलना या फिर आँखों या दांतों के डाक्टरों से इलाज कराने से  ये बीमारियाँ फैलती हैं |

9.     सामूहिक फैलाव (Community transmission) : जैसे किसी समूह को होने वाले संक्रमण होने का यदि सुराग लग सके – जैसे कि  फलां आदमी से फलां आदमी के द्वारा यहाँ पहुंचा है – तो संक्रमण को कंट्रोल में समझा जाता है | इसलिए प्रशासन के लिए contact tracing एक महत्वपूर्ण कार्य होता है | दूसरी ओर–काफी ज्यादा मरीज मिलने लगें जिनके संक्रमण का सुराग ना लग सके- तो इसे सामूहिक फैलाव की श्रेणी में रख दिया जाता है | ये स्थिति काफी चिंताजनक होती है|

10.        स्पर्श जानकारी (Contact tracing): संक्रमण होने के सुराग लगाने की जानकारी – जैसे कि  फलां आदमी से फलां आदमी के द्वारा किस आदमी तक पहुंचा |

11.      महा-फैलावी (Super spreader) :  ऐसी  जगहें , जहाँ पर बहुत सारे लोग एक जमावड़ा बनाते हों- जैसे – सब्जी या मछली बाजार – जहाँ छोटे-2  ठेले एक साथ रखे हों, या ऐसी जगहें जहाँ लोग किसी मीटिंग या पार्टी में गए हों और एक साथ बहुत सारे लोग संक्रमित होने का आभास हुआ हो |

12.     सह-रुग्णता ( Co-morbidity)
एक  स्थिति जब ऐसे लोग  संक्रमित हो जाएँ जिनको हधुमेह, कैंसर या ह्रदय की बीमारियाँ  भी हों – इसे सह-रुग्णता कहा जाता  है|  इन लोगों को ज्यादा देखभाल की जरूरत पडती है | सामान्यतया अधिक उम्रदराज  लोग इस श्रेणीं में आते हैं |

Dr. Guleria of AIIMS New Delhi had informed in several interviews to AIR/DD  news during May 2020 that generally 80% people will have very mild or no symptoms after exposure to covis19 virus.  But for people with diabetes, controlled BP or any other disease such as cancer would make it difficult to treat for COVID19.  Therefore, having a prior health condition such as those described along with the covid19 is known as co-morbidity.  Thus co-morbidity is a strong risk factor.

13.            धनात्मकता की दर (Positivity rate):  यदि १०० लोगों का टेस्ट हुआ हो और उसमें से 5 लोगों में यदि बीमारी  का  वाइरस पाया जाता है (चाहे वह व्यक्ति संक्रमित हो या नहीं ) तो धनात्मकता की दर 5% होगी. भारत में यह दर करीब करीब इसी तरह (<10) है | यदि यह दर बहुत ज्यादा है तो इसका मतलब ये भी हो सकता है कि सिर्फ अधिक संख्या वाले समूहों में ही टेस्ट हो रहें हैं –आदि |


14.           संक्रमित मृत्यु दर (Infection fatality rate):  यह संक्रमित जगहों पर संक्रमित लोगों में हुई मृत्यु दर है, चाहे उनमें से कुछ संभावी रूप से संक्रमित हो सकते थे पर संक्रमण के लिए टेस्ट नहीं किये गए |  

15.          केस मृत्यु दर (Case fatality rate): यह पक्के चिन्हित संक्रमित लोगों में हुई मृत्यु दर है|  

16.         अत्यधिक सांस लेने की तकलीफ (Sever acute respiratory SARI):  यह कोरोना वायरस द्वारा हुई उसी तरह के लक्षणों वाली बीमारी है- जो खांसने- छीकने द्वारा बूंदों से फैलती है|

17.         साइटोंकिन तूफ़ान (Cytokine storm): तीव्र संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर द्वारा दागी गयी एक प्रतिक्रिया-प्रतिराक्ष्या प्रणाली को साइटोंकिन तूफ़ान के नाम से जाना जाता है |  इसके तहत शरीर बहूत प्रकार के प्रतिरक्षात्मक प्रतिरोध में इस्तेमाल किये  जाने  वाले प्रोटीन, साइटोंकिन को जल्दी-जल्दी  खून में प्रवाहित कर देता है|  सामान्यतया ये प्रतिराक्ष्या प्रणाली में ठीक-ठाक तरह से काम करते हैं –जबकि यहाँ बहुत अधिक होने की वजह से ये उल्टा काम करने लगते हैं | इस स्थिति में मृत्यु वाइरस की वजह से नहीं, बल्कि इस गड़बड़ से होती है |


18.            RT PCR (reverse transcription polymerase chain reaction): यह एक कोविद १९ संक्रमण को पहचान करने का टेस्ट है | यह नाक और गले से लिए गए द्रव में वाइरल RNA की पहचान करने में सक्षम है |

19.          चिकित्सा एवं निदान  सह संयोजक प्लाज्मा चिकित्सा (Covalescent plama therapy) :इस  पुरानी चिकित्सा पद्धति में संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के खून से प्राप्त एंटी बोडी को बीमार व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है | 

20.      कोविद से लोहा लेने वाली दवाएं : रेम्डेसीवियर (Remdessivier),  हाईद्रोक्सीक्लोरोक्वीन  (Hydroxychoroquine), dexamethasone (डेक्सामेथासोन) , Favipiravir: ये कुछ पहले से उपलब्ध दवाइयां हैं जो कोविद-१९ से लड़ पा रहीं हैं , हालाँकि इनमें से कोई भी दवा रामबाण साबित नहीं हुई है|  अब तो वैक्सीन का इन्तजार है , और इन्तजार है झुण्ड प्रतिरोधकता का |


आभार: इस लेख को बनाने में The HINDU June 7, 2020 एवं अनेक स्रोतों से प्राप्त जानकारियों का इस्तेमाल किया गया है |

प्रेम, जून २५, २०२०.